Monday, November 22, 2010

अथ श्री सरिसब-पाही कथा शुरू : योगाकर झा

हमरा लोकनि, माने इन्द्रकर झाक (सोने झा सँ प्रसिद्ध) बेटा स्व. दिवाकर झाक (जनिका 'बच्चा' सेहो कहल जाईत छलन्हि आ हुनका समवयस्क लोकनि बच्चा बाबू कहै छलखिन कियैक त ओ अपन सात भाई मे सबसँ छोट छलाह) परिबार। हमरा लोकनि कुजौली मूल क भखरौली शाखाक (कुजलिवार भखरौली मूलक) शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यन्दिन शाखिय कात्यायन गोत्र आ 'कात्यायन-विष्णु -अंगिरस' त्रिप्रवरक श्रोत्रिय ब्राह्मण (माने 'सोइत') छी. हमर सबहक बीजी पुरुष अर्थात चौदहम शताब्दी मे कुजौली नामक गाम मे जे ब्राह्मण छलाह ओ अपन प्राचीनतम पुरखाक 'दांती'क संतान छलाह । हमर सबहक समय तक २३ सँ २६ पीढ़ी करीब करीब ६०० बरख मे कएक टा गाम मे हिनक संतान सब बसि गेलाह अछि आ अलग अलग शाखा मूल सँ परिचित छथि जेना 'कुजलिबार भखरौली', 'कुजलिबार मलंगिया' इत्यादि। सोतिपूरा आ योगपूरा मे कुजलिबार मूलक भखरौली शाखा मूलक छथि। बांकी जयवार ब्राह्मण मे जेना सोतिपूरा मे बित्ठो आ सरिसब गाम मे, योगपूरा मे हरिपुर, गोहिमिसर लगमा गाम मे। कुजलिवार मूलक किछु परिवार बैद्यनाथधाम क पंडा लोकनि सेहो छथि जे लगभग चारि सय बर्ष पूर्व आयल हेताह --ओ लोकनि शुद्ध मैथिल छथि जे 'बाबा' के, भगवती के 'गछती' देत छथिन्ह ( गछई छथिन जे यदि मनोकामना पूर्ण होयत त फलां वस्तु देब), गोसौन के प्रणामी दैत छथिन जखैन कि हमरा लोकनि मुसलमानी भाषाक सम्पर्कित भ के बाबा के 'कबूला' करैत छियेन्ह आ भगवती के 'सिरहर सलामी' दैत छियैन..
हमरा लोकनिक परिवारक पांच-छः पीढ़ी पूर्व किछु गोटे लोहना आ बित्ठो आबि के बैसलाह , ओत सँ रैमा आ फेर काल क्रमे सरिसब मे अखनि जतय दर्जियाही टोल अछि ताहि सँ पूव बैसलाह... (क्रमशः )

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